ईश्वर की तरह सर्वव्यापी हो चुका है,भ्रष्टाचार

नरसिंहपुर-नरसिंहपुर जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली सिर्फ भगवान भरोसे ही चलती नजर आ रही है,यहाँ आये दिन नए घोटाले एवं अमानवीय कृत्यों की गाथाएं अखबारों की सुर्खियों में छाई रहती हैं।एक के बाद एक घोटाले की खबरों से जिले की जनता का कानून व्यवस्था पर से विश्वास उठना भी लाजमी है।
जिले समेत समस्त भारत मे व्याप्त भ्रष्टाचार की तुलना ईश्वर की भांति की जाए तो गलत नही होगा,अब इसके लिए भी तर्कों की आवश्यकता होती है,जिस प्रकार ईश्वर दुनिया के कण कण में व्याप्त माना जाता है,उसी प्रकार हर सरकारी महकमे में भी भ्रष्टाचार व्याप्त है।और यह बात जिले की जनता सार्बजनिक रूप से स्वीकार करती है।जिस प्रकार ईश्वर को खुस करने के लिए प्रसाद में नारियल अगरबत्ती मिष्ठान एवं दान पात्र में पैसे डालने की परंपरा है उसी प्रकार इन सरकारी महकमो में भी अधिकारी वर्ग को खुश करने के लिए कुछ न कुछ चढ़ोत्तरी चढ़ानी होती है,जिस प्रकार ईश्वर को भक्त पसंद होते हैं।उसी प्रकार भ्रष्टाचार को भी भृष्टाचारी ही पसंद होते हैं।यहाँ सच बोलने बालों या फिर सच लिखने बालों की बात कोई सुनने बाला नही सिवाह जनता के जिले में विगत दिनों में अनेकों घोटाले सामने आए जिन पर जाँच एवं कार्यवाही की तलबार लटकी रही कुछ मामलों में कुछेक कार्यवाही की गईं और कुछेक मामलों को जाँच की लॉलीपॉप के नाम पर लटका दिया गया।
मिट्टी तेल घोटाला-
नगर के ही एक पेट्रोल पंप संचालक द्वारा लाखों रुपये के मिट्टी तेल का गबन किया गया था।लगभग 48000 लीटर मिट्टी तेल सोसायटी में पहुँचने की बजाय भृष्टाचार की भेंट चढ़ गया,महीनों बीत जाने के बाद अब जाकर उक्त पेट्रोल पंप को सील किया गया।देर आये दुरुस्त आये,प्रशासन का यह कदम सराहनीय ही माना जाएगा,परंतु जिन लोगों को यह मिट्टी तेल पहुचाया जाना था और नही पहुंचा उनकी आपूर्ति किस प्रकार की जाएगी,उस गरीब जनता को जो परेशानियां इस घोटाले की वजह से उठानी पड़ीं उसकी जबाबदेही किसकी होगी, यह आज भी एक सवाल है।
रिश्वत लेते मंडी सचिव गिरफ्तार-
कल ही नरसिंहपुर कृषि उपज मंडी सचिव बीके शुक्ला को लोकायुक्त कि टीम द्वारा 20000 की रिश्वत लेते रंगे हाँथो गिरफ्तार किया गया।शिकायत करता रामकुमार अग्रवाल एक व्यापारी है।जिस की फैक्ट्री में जाकर मंडी सचिव एवं उनकी टीम द्वारा जाँच की गई एवं 50000 रु की रिश्वत की माँग की गई,शिकायत कर्ता के अनुसार वह अनेकों बार पूर्व मंडी सचिव श्री विजयवर्गीय को भी लाखों रुपये बतौर रिश्वत दे चुका है,औऱ जब कुछ ही दिनों पूर्व आये हुए नए सचिव द्वारा भी उनसे रिश्वत माँगी गई तो वह अत्यधिक प्रताड़ित हो गए,एवं तंग आकर उन्हें लोकायुक्त की मदद लेनी पड़ी।यहाँ सवाल यह उठता है कि वर्तमान मंडी सचिव तो अपनी पारी की शुरुआत में ही रनआउट हो गए परंतु भृष्टाचार की क्रिकेट में ही अनेकों सेंचुरी लगा चुके पूर्व मंडी सचिव विजयवर्गीय से उनके भ्रष्टाचार का हिसाब कौन लेगा,एवं जो जिले के आला अधिकारियों की इसके लिए जबाबदेही बनती है,वह इस भृष्टाचार एवं अवैध वशूली से किस प्रकार अछूते रह सकते हैं।
बच्चादानी प्रकरण–नरसिंहपुर जिला चिकित्सालय में ताजा मामला जिसमे सामने आए आंकड़ो ने आमजन एवं मीडिया जगत को सोचने और विवस कर दिया,विगत 9 माह में 599 बच्चादानी निकलने के ऑपरेशन किये गए,जिस पर प्रभारी मंत्री के आदेश पर कलेक्टर महोदय द्वारा जाँच टीम गठित की गई है,परन्तु जनता में प्रशासनिक कार्यप्रणाली के प्रति कितना विश्वास है,इस बात का अंदाजा गली एवं नुक्कड़ों पर चल रही चर्चाओं से लगाया जा सकता है,जनता में चर्चा है कि इस जाँच में भी कछु नई होने,आखिरी में सब लै दै के निपट जैहै,और डॉक्टरों है क्लीन चिट मिल जै है,अब इस मामले में आगे क्या होता है वक्त ही बताएगा, जबाबदार अधिकारी इस मामले में भी अपने आप को गंगा नहाया हुआ जताने का प्रयास कर रहे हैं।
इसके अलावा भी दाल घोटाला,एवं मंडी में लगातार हो रहे किसानों के शोषण पर अब तक जिम्मेदार अधिकारी कन्नी काटते नजर आ रहे हैं।नरसिंहपुर के किसी भी प्रशासनिक कार्यालय या फिर ग्राम पंचायतों की बात की जाए तो बगैर रिश्वत के यहाँ पत्ता नही हिलता,ग्राम पंचायतों में तो आज भी मुर्दों से मनरेगा में मजदूरी कराई जा रही है,यदि उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए तो जिले की ग्राम पंचायतों का यह घोटाला,सारे रिकॉर्ड तोड़ सकता है।इन सब मामलों में भी जाँच के नाम पर फाइलों को घुमाने का शिलशिला जारी है।भृष्टाचार यहाँ हर कदम पर है,जिस पर अंकुश लगा पाना शायद नामुमकिन सा प्रतीत होने लगा है,एवं जिले की शासन प्रशासन व्यवस्था को संभालने बाले जबाबदार मूक दर्शक बने तमासा देख रहे हैं।ऐंसी स्थिति में यह बात बिल्कुल सही शिद्ध होती है कि ईश्वर की तरह सर्वव्यापी है भ्रष्टाचार ।